एक खत करण जौहर के नाम।(ऐ दिल है मुश्किल)

एक खत -करण जौहर के नाम।
(ऐ दिल है मुश्किल)
महोदय,’.ऐ दिल है मुश्किल’ के ऊपर चलने वाली tv चर्चा ने दिमाग में दर्द डाल कर मुश्किल कर दिया है।
1) करण जौहर ने क्या भूल गए की 2013 में भारतीय सोल्जर का सिर पाकिस्तानियों ने काटे थे। बम्बई में आतंकवादी हमले की यादें भी साथ है।जहाँ सैकड़ो आम आदमी के साथ वफादार पुलिसवाले शहीद हुए थे।वह वहीं पुलिसवाले है जो 24 घण्टे आप जैसे सेलेब्रेटी की सुरक्षा करते है।फिर वह 2014-15 में पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर फिल्म कैसे बना सकते है।कैसे कह सकते है कि उस वक्त हालात अच्छे थे।जिन्हें याद नहीं उनके लिए फोटो भी डाला है।उन परिवार वालों को शहीदों के कटे हुए सिर जो अभीतक नहीं मिले है।जापान में 80 साल पहले अमरीका ने परमाणु बम फेका था उसके विरोध में आज तक जापान के मार्केट में अमरीकन चीजे होती है लेकिन एक भी चीज कोई खरीदता नहीं ।उस से हम कुछ सीखने वाले नहीं?

2) यदि कोई कला का विरोध है यह मानते है बड़े बड़े भाषण देते है वह कभी न कभी तथाकथित पुरोगामी बनकर आरक्षण का समर्थन भी करते दिखते हैं तो अपने देशवासी कलाकारों के लिए आरक्षण क्यों नहीं मांग रहे? मै एक उदाहरण देना चाहूंगा।जब करन जौहर पाकिस्तानी टेलेंट की बात करता है तो उसी वक्त वह 125 करोड़ भारत वासियों का अपमान करता है।हमारे नौजवान कुछ कम है क्या?मराठी भाषा में सैराट नाम की फिल्म बनी जिस में सारे कलाकार गरीब घर के (पिछड़ों में से भी थे )सामान्य चेहरों के जिन्होंने कभी जिंदगी में अभिनय नहीं किया था।फिर भी फिल्म 100 करोड़ कमा पाई। आप ने इस फिल्म झिग झिं झिंगाट यह गाना सुना होगा।तो 50-60 करोड़ वाली फिल्म के लिए ड्रामा क्यों।हंगामा क्यों?

3) पाकिस्तान छोड़कर किसी देश के खिलाफ जनमत नहीं है।कैटरीना कैफ जैसी यूरोपियन मुस्लिम ,जैकलीन जैसी श्रीलंका की अभिनेत्री को,विदेशी मूल की अनेक अभिनेत्रियों को स्वीकारता है। यूरोपियन अमरीकन डायरेक्टर को स्वीकारता है।विदेशी क्रिकेट कोच स्वीकारता है।वहां कोई विरोध भी है क्या? लेकिन जो देश तो कई हिंदुस्थानी कलाकारों को पाकिस्तान का प्रेम क्यों उमड़ आता है।देशवासियों पर आरोप करना बंद करो।

4)बचाव के लिए जो बुद्धिमान (बेचे गये) आते है वह कहते है की सीमा पर व्यापार चालू है बस ट्रेन चालू है, तो कलाकारों पर आक्रमण क्यों ?व्यापार से समाज के ऊपर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता कोई इमोशन जुड़ा नहीं होता ।लेकिन जिस भारत देश के पढेलिखे गवाँर लोग फ़िल्मी अभिनेता को भगवान जैसा पूजते हैं मंदिर भी बनाते है।बालों से लेकर कपड़ों तक सब अंधा अनुकरण वहाँ मूर्खों के सामने नया विदेशी आदर्श (????)क्यों रख रहे हो ?

5)जो भारतीय पाकिस्तान के कलाकारों को इसी लिए लेते है क्योंक़ि पाकिस्तान में उनका बिजनेस चले।पैसे मिले। ऐसा सुना है कि पाकिस्तान से करोड़ों की कमाई होती है। वह सीधे मार्ग से भारत लाते हैं तो मुझे कोई आक्षेप नहीं उल्टा अच्छा है ।
(लेकिन इन बड़बोलों से अक्षयकुमार जैसे सब से ज़्यादा 20 -30 करोड़ो रूपयों का एडवान्स टेक्स देने के आंकड़े नहीं सुने।उल्टा यह सुना है की इनके कई दोस्त तथा पुराने फिल्मों के हिरों पर टेक्स चोरी के मामले में पूछताछ चल रहीं है।)

6) देशभक्ति की बाते करते है लेकिन नाना पाटेकर ,मकरंद जैसे कलाकार अकालग्रस्त के लिए करोड़ो रूपये दान दे रहे थे तब यह बाकी बड़बोले कहाँ थे।

7) हर गलती का आदमी का हर आदमी प्रायश्चित्त लेता है ,लेकिन करन जौहर ने सैनिकों के परिवारों को मुनाफे का कोई हिस्सा देने की कोई बात भी नहीं की।तो उसकी लड़ाई फायदा कमाने की है।वह देशभक्ति की बात क्यों कर रहा है?सुना है 5 करोड़ आर्मी वेलफेयरफंड को देने की बात चल रही है। प्रॉफिट का 5% ,भी नहीं अर्थात 500 करोड़ का बिजनेस करेंगे 1% सैनिकों को देंगे।अच्छा है उल्लू बनाने का धंदा।और सभी विरोध करनेवाले मान भी गए??????? क्यो?tv news में सुनकर
यह अच्छा लगा की देशभक्त पूर्व सैनिकों ने जबरदस्ती का डोनेशन लेने से मना किया है।वह विचारों पर अडिग है।

8) ‘बजंरगी भाईजान’ जैसी फिल्म रीयल रिश्ते सुधारने की अच्छि कोशिश थी उसमें तो पाक कलाकारों की जरूरत थी फिर भी सारे प्रमुख कलाकार भारतीय थे।फिर भी फिल्म भी रियल लगी।

9)इस फिल्म में ऐसी कोई जरूरत नहीं फिर करन जौहर को को सिर्फ पाकिस्तान से होनेवाला ज्यादा प्रॉफिट का लालच दिखता है।करण जौहर वह कोई सामाजिक फिल्मे नहीं बनाता रोमेंटिक फिल्मे बनाता है। वह भी सुन्दर सुन्दर चेहरे की अमीरों के सुंदरता के दर्शन(सपने) करोड़ो गरीबों को बेचने वाला।उनसे पैसे कमानेवाला।उसने आज तक गरीबी के या गरीबों के दर्द पर कोई फिल्म नहीं बनाई।

10)एक नई कहावत है भैस कितना भी ज्यादा दूध देती हो उसे गोद में लेकर बैठोगे तो गोबर की बदबू सहनी पड़ेगेही। जान बूझकर गलती करनेवालों को क्या कहें ?.(इतनी जोर जोर से आतंकवाद पर भी बोला करो ।)

11)बिजनेस वीजा पर पर जो भारत में आते है।उनसे तो देश का फायदा होता है।लेकिन जो टूरिस्ट वीजा पर बुलाकर फिल्मे बनाते है वह देश का नुकसान करने वाले होते है।तो उनके लिए इतनी चर्चा क्यों ?

12)इन विचारों का विरोध करने वाली राजनितिक पार्टियों से कोई सम्बद्ध नहीं।
फिल्म देखना या न देखना पूर्णता आप का डिसिजन होगा।मेरा वह काम नहीं।मेरा काम सिर्फ देश की तरफ से कुछ विचार ऱखना।समीक्षा करना है।हो सकता है कुछ मेरे विचार गलत भी हो।
धन्यवाद।
एक परेशान आम आदमी।
(RAJENDRA RANE-).
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