शिवाजी महाराज-वर्तमान संदर्भ में..

इतिहास वह नहीं होता,

जो पुरस्कार अथवा डिग्री के

लालच में लिखा जाता हैं । 

 अपनी कमज़ोरियाँ छुपाने के लिए….

  पुरखों का इतिहास….

   वह भी कालिखभरा…..

    चमकाया जाता हैं।

इतिहास को लिखित रूप में

बदलने की कोशिश भी करते हैं,

तथाकथित बुद्धिवादी……

         अरे! ,इतिहास…..

        कागज़ कलम से नहीं बनता।

       वह अंकुरित होता हैं …

      धरती माता के आंचल में।

     उसके पदचिह्न-आज भी अंकित हैं

      धूल के कण-कण में….

हर इतिहास प्रसिद्ध प्रेरणाओं का,

आदर्शों के नाम पर

जय-जयकार तो हम करते हैं।

लेकिन उनके विचारों को

हम दूसरों को बताना नहीं चाहते।

सच बताएँगे तो…हमारे भ्रष्टाचार की,

स्वार्थ एवं मक्कारी की…

सभी दुकानें बंद हो जाएंगी। 

        आजाद भारत के हर जाति ने ..

         हर राजनीतिक पार्टियों ने…

        या उनके नेताओं ने…

         हर महापुरुषों के चित्रों को…

         स्मारकों को ….अपने

        बाप-दादाओं की जागीर बना दी हैं।

          सत्तारुढ़  पार्टी हो या विपक्ष

          उस महापुरुष से प्रेम करनेवाले

या उसकी नफरत करनेवाले,

दोनों भी सूर में सूर मिलाकर

उन महापुरुषों का जयजयकार करते है

तब मुझ जैसी आम जनता

का दिमाग चकराने लगता है.

      लेकिन एक बात तो माननी पड़ेगी

      आज इक्कीसवीं सदी में

     हमारा लोकतंत्र,प्रजासत्ताक गणराज्य

      लगभग सत्तर वर्ष का हो गया हैं,

       लेकिन आज

       तीन-चार सौ साल पहले के

       एक राजा का स्मरण किया जाता हैं।

       यहीं, उस राजा के सार्वभौमिकता

        एवं सर्वकालिकता को

       प्रामाणित करता हैं।

       उस राजा का नाम था……….

        छत्रपति शिवाजी महाराज।

जिन्होंने,समाज के धरातल के साथ

अपने आप को जोड़ते हुए,

तत्कालीन समाज में जो हाहाकार था…

रुन्दन था… करुण क्रंदन था…

उसे देखा, उसे दूर करते हुए,

स्वतंत्रता की एक चेतना जगाई।

छत्रपति शिवाजी को किसी एक महाराष्ट्र राज्य,

या मराठा जाति तक सीमित रखकर

हम उनका अपमान कर रहें ………………………………………………….

सन्दर्भ :- Ref :-

Shivaji Maharaj,(Part-1) Speech by Rajendra Rane
(on Youtube videos )

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